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गुरुवार, सितंबर 24

राजा को समर्पित
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रात का राजा चलता जाए
सूरज को भी छलता जाए

हँसी के नश्तर रोज चलाये
सुख की कलियाँ कटती जाएँ

सुख के बस नगमे ही गाये
दुखों के काँटे बोता जाए


भूखों के हिस्से का खाये
चमक दमक तब शाह में आये


बैरागी खुद को बतलाये
रंग भरी महफिलें सजाये


खोद खोद मुर्दे उठवाए
सदियों पीछे दौड़ लगाये


बस उलटा ही चलता जाए
सूरज को भी छलता जाए

--संध्या नवोदिता

मंगलवार, जनवरी 5

मैं हूँ मानवी

मैं हूँ 
समर्पण है ,समझौते हैं ,
और तुम हो बहुत करीब 

मैं हूँ 
हँसी है ,खुशी है 
और तुम हो नजदीक ही

मैं हूँ 
दर्द है ,आंसू है ,
तुम कहीं नहीं 

मैं हूँ मानवी 
ओ सभ्य पुरुष !!
      --संध्या नवोदिता

बड़ी उम्मीदों से

बड़ी उम्मीदों से
मैं तुम में तलाशती हूँ
एक साथी

और नाउम्मीद हो जाती हूँ हर बार
एक पुरुष को पाकर 

     --संध्या नवोदिता

शुक्रवार, दिसंबर 25

तुम्हारी तरह मैं प्यार करता हूँ


तुम्हारी तरह 
मैं प्यार करता हूँ
प्यार को,
ज़िंदगी को,
चीजों की मीठी खुशबुओं को,
जनवरी माह के आसमानी नज़ारे को 
प्यार करता हूँ

मेरा लहू उबलता है
मेरी आँखें हंसती हैं
कि मैं आंसुओं की कलियाँ जानता हूँ
मुझे भरोसा है कि दुनिया खूबसूरत है

और कविता रोटी की तरह
सबकी ज़रूरत है

और यह 
कि मेरी शिराएँ मुझमें ही ख़त्म नहीं होतीं
बल्कि ये लहू एक है
उन सबका 
जो लड़ रहे हैं ज़िंदगी के लिए,
प्यार के लिए,
सुन्दर नजारों और रोटी के लिए
और सबकी कविता के लिए.....


सत्ताईस बरस


सच में
गंभीर बात है
सत्ताईस बरस का होना
बेहद संजीदा बातों में
एक है -
दोस्तों के हमेशा-हमेशा के लिए  जाने का ख्याल
बचपन का गुमशुदा होना
किसी को ये शुबह होना
कि कालजयी है वह खुद .

 

      (रॉक डाल्टन की कविता का हिंदी अनुवाद : संध्या नवोदिता )

रविवार, दिसंबर 13

फिर भी इन्द्रधनुष देखेंगे


आती रुत के मन पर घाव जाती रुत के ज़ख्म हरे हैं 
कुछ खोया है कुछ पाया है नश्तर ये काफ़ी गहरे हैं 
फिर भी इन्द्रधनुष देखेंगे फिर भी हम पकड़ेंगे चाँद
आंसू वाली आँखों में उम्मीदों के भी रंग भरे हैं

गुरुवार, दिसंबर 3

गलती वहीं हुई थी

तुम्हारे अंधेरे मेरी ताक में हैं
और मेरे हिस्से के उजाले
तुम्हारी गिरफ्त में

हाँ , ग़लती वहीं हुई थी
जब मैंने कहा था
तुम मुझको चाँद लाके दो

और मेरे चाँद पर मालिकाना तुम्हारा हो गया .

एक दिन बेटियाँ

माँ
काश सब बेटियों की माएँ हों
बिल्कुल तुम सी

बेटी की बला ले लें अपने ऊपर
उसके खौफ़, उसकी पाबन्दियाँ, उसके पहरे
सब बदल जाएँ
घने प्रेम और विश्वास में

कहें बेटियों से
कंधे सीधे रखो
और सिर ऊँचा
नाज़ुक नहीं मज़बूत बनो

बेटियाँ पतंग नहीं होतीं न
बेटियाँ वर्तमान होती हैं
बेटियाँ भविष्य होती हैं
और बेटियों का भी होता है

वर्तमान और भविष्य

एक दिन बेटियाँ
हो जाती हैं माँ भी
तुम्हारी जैसी बेटियों की
तुम्हारी जैसी माँ.

इन दिनों

एक जंगल सा उग आया है
मेरे भीतर
इन दिनों

वहाँ रास्ते नहीं
पगडंडियाँ नहीं
कोई जाने पहचाने निशान नहीं

कोई जल्दी नहीं
बेखबर है यह दुनिया
समय की हलचलों से

चाँद उग आया है यहाँ
उल्टा होकर !

रिश्ता

मेरे पास चिड़िया है
चिड़िया के पास हैं पंख
पंखों के पास है परवाज़
और परवाज़ के पास है
पूरा आसमान


पंख, चिड़िया, परवाज़, आसमान और मैं
यह रिश्ता बहुत पुराना है.