मंगलवार, मई 3


अमेरिका की रक्षा करने वालों को सलाम ओबामा कहते हैं . हमें तो यह कहना पड़ता है कि जो अमेरिका से दुनिया की रक्षा करे उसे सलाम !!



         यह कहना कि आई. एस. आई. को ओसामा के छिपने की जगह पता थी और पाकिस्तान ने उसे अमेरिका से छिपाए रखा यह तो अब बच्चे भी जानते हैं कि दुनिया में अमेरिकी खुफिया एजेंसी सी.आई.ए. की क्या हैसियत है और सी.आई.ए. और आई.एस.आई. में कौन एजेंसी ज्यादा ताकतवर ,कुशल और सुविधा संपन्न है .जो सी.आई.ए. दुनिया के किसी भी देश के नागरिक के बाथरूम तक की खबर रखती है,जो अमेरिका किसी भी देश में अपनी फौजें घुसाकर हमला कर सकता है,क्या आई.एस.आई. और पाकिस्तान की हैसियत उससे बड़ी है ? सी.आई.ए. के सामने आई.एस.आई. और अमेरिका के सामने पाकिस्तान की क्या औकात है ? जब अमेरिका ने अपने फ़ौजी अड्डे पाक में बना लिए, अमेरिकन फ़ौज और सी.आई.ए. खुद ही पाक में घुसी हुई है तो अब इस थ्योरी को गढ़ना बेतुका है कि आई.एस.आई. को सब पता था और अमेरिका को नहीं !
        अमेरिका ने ही तालिबान को खड़ा किया पूर्व सोवियत संघ को तोडने के लिए अमेरिका ने इस तरह की कमजोर साम्प्रदायिक आवाजों को हथियार  और पैसा देकर मजबूत बनाया , उन्हें तालिबान के रूप में पहचान दी . सोवियत संघ के टूटने के बाद भी दक्षिण एशिया में अपने सैनिक अड्डे बनाकर इस डर को भुनाया. अमेरिकी अर्थव्यवस्था मुख्यतः हथियारों, ड्रग्स और सेक्स पर ही चलती है. दुनिया में आतंकवाद का डर पैदाकर अमेरिका ने खरबों डालर के हथियार बेचे, दुनिया भर में अपने सैनिक अड्डे बनाए , तमाम देशों में अमेरिकापरस्त सरकारें बनवाईं और अमेरिकी कंपनियों को कई निवेश, कहीं विकास, तो कहीं पुनर्निर्माण के नाम पर घुसाया. अमरीका से बड़ा आतंकवादी कौन है जिसकी मर्जी के बिना दुनिया में पत्ता तक नहीं हिलता और जो पूरी दुनिया में तबाही ढा रहा है, दुनिया में आतंकवादियों ने जितने लोगों को मारा है उससे हजार गुना ज्यादा जानों का खून अमेरिका के दामन पर दर्ज है

दूसरी बात दाउद इब्राहीम ओसामा जैसा आतंकवादी नहीं, वो अंडरवर्ल्ड सरगना, ड्रग्स और हथियार का अंतर्राष्ट्रीय माफिया है. और उसे पनाह देने वालों में अमेरिका भी रहा है. भारतीय मीडिया जबरदस्ती खबर को दमदार बनाने के लिए दाउद को कब पकड़ोगे ? जैसा सवाल पेश कर रहा है. अमेरिका अगर ड्रग्स और हथियार माफिया का डायनासोर है तो दाउद उसके सामने चीटी की तरह है . सारे गंदे धन्धो की जड़ें और खाद पानी अमेरिका में ही है.

मीडिया लगातार उकसा रहा है कि जैसे अमेरिका ने पाकिस्तान में घुसकर ओसामा को मार गिराया वैसे ही अमेरिकन फौजों की अगुवाई में भारतीय फ़ौज को पाकिस्तान पर हमला कर देना चाहिए. अमेरिका दुनिया के सभी आक्रमणों का अगुवा है और यह बात भी अमेरिका के ही हित में है कि जैसे आतंकवाद से युद्ध के नाम पर पाकिस्तान अमेरिका की मुट्ठी में चला गया वैसे ही भारत भी पूरी तरह अमेरिका की कठपुतली बन जाए .

         दाउद के खिलाफ बोलने वालों में वही बालीवुड सबसे आगे है जहाँ के रुपहले परदे के पीछे काली दौलत की कालिख पुती हुई है. इन्हीं अंडरवर्ल्ड सरगनाओं के काले पैसे से करोड़ों के बजट की फ़िल्में बनती हैं. क्या दाउद की कालिख में बालीवुड का कोई हिस्सा नहीं ? दाउद मर गया तो बालीवुड की कालिख का पता कौन बताएगा ?
          दाउद को गोली मारने से पहले बालीवुड के चमकीले चेहरों से यह जरूर पूछा जाना चाहिए कि एक फिल्म पर करोड़ों स्वाहा करने के लिए इतना इफरात पैसा आखिर किन तिजोरियों से आता है ?
         हम न ओबामा/अमेरिका साथ हैं न ओसामा/आतंकवाद के साथ . दुनिया का नुकसान तो ये दोनों ही कर रहे हैं फर्क यही है कि पहला अपने हित में  कानून बनाकर दुनिया भर में हमले कर रहा है, अपनी बड़ी पूँजी घुसाकर तमाम देशों के उद्योग-धंधे और खेती  तबाह करके करोड़ों लोगों को गरीबी और भुखमरी के समुद्र में धकेल रहा है तो दूसरे को कानून की कोई जरूरत नहीं है . दुनिया के खिलाफ अपराध में आतंकवाद , अमेरिकन साम्राज्यवाद की  फितूरी और नाजायज औलाद है. दुनिया की बर्बादी के लिए ये दोनों ही ज़िम्मेदार हैं .

अमेरिका की रक्षा करने वालों को सलाम ओबामा कहते हैं . हमें तो यह कहना पड़ता है कि जो अमेरिका से दुनिया की रक्षा करे उसे सलाम !!

5 टिप्‍पणियां:

  1. बेनामीमई 03, 2011

    बीबीसी के अनुसार सऊदी अरब में एक यमन परिवार में पैदा हुए ओसामा बिन लादेन ने अफगानिस्तान पर सोवियत हमले के ख़िलाफ़ लड़ाई में हिस्सा लेने के लिए 1979 में सऊदी अरब छोड़ दिया.

    अफगानी जेहाद को जहाँ एक ओर अमरीकी डॉलरों की ताक़त हासिल थी वहीं दूसरी ओर सऊदी अरब और पाकिस्तान की सरकारों का समर्थन था. मध्य पूर्वी मामलों के विश्लेषक हाज़िर तैमूरियन के अनुसार ओसामा बिन लादेन को ट्रेनिंग सीआईए ने ही दी थी.

    अफ़ग़ानिस्तान में उन्होंने मक्तब-अल-ख़िदमत की स्थापना की जिसमें दुनिया भर से लोगों की भर्ती की गई और सोवियत फ़ौजों से लड़ने के लिए उपकरणों का आयात किया गया.

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  2. ये जानता हूँ तेरी नीयत का खौफ जलजला था साफ़ था

    मगर ये क्या कि उसका हर जुर्म तेरे किये के बरख्श माफ था .

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  3. बेनामीमई 04, 2011

    Sandhya jee Namaskar,
    Apka aakrosh apni jagah jayaj hai aur nischay hi ise ujagar hona chahiye.Lekin media wale jab media se hatasha prakat karte hain to sochna padta hai ki surat badalne wali hai ya yah bebasi ki aawaz hai.
    Saurabh she.

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  4. बेनामीमई 04, 2011

    Dear madamji,
    Aapki lekhni ke hum pehle se hi kaayal hain. Har lekh par comment karna mere bas mein nahi. Sirf sadhuvaad de sakte hain, swikar kariyega.
    Pankaj Bhatnagar

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  5. आपका ब्‍लॉग देखकर अत्‍यंत प्रसन्‍नता हुई। मैं भी लेखन से जुडा हुआ हूं। मेरा अक्‍सर इलाहाबाद आना जाना होता है क्‍योंकि वहां मेरे कई आत्‍मीय मित्र हैं। अगर संभव हो तो आप मेरा ब्‍लॉग देखें www.vichar-bigul.blogspot.com

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